क्या हुआ जो उसने रचा ली हाथों में

क्या हुआ जो उसने रचा ली हाथों में मेहँदी, अब हम भी सेहरा सजायेंगे;
क्या हुआ वो हमारे नसीब में नहीं अगर, तो अब हम उसकी छोटी
बहन पटायेंगे…!

वो छत पर चढे पतंग उड़ाने के बहाने

वो छत पर चढे पतंग उड़ाने के बहाने;
बाजु वाली भी आई कपड़े सुखाने के बहाने;
बीवी ने देखा ये हसीन नजारा और वो डंडा ले आई;
बन्दर भगाने के बहाने…!!

सितम ढाने की हद होती

सितम ढाने की हद होती है, पास ना आने की रूठ जाने
की हद होती है,
एक SMS तो कर दे जालिम, पैसे बचाने की भी हद होती है..!

चलो आज अपने बचपन को

चलो आज अपने बचपन को
फिर से बुलाते है
और भरी दोपहर में फिर से पड़ोसी की
डोर बेल बजा के भाग जाते है… 🙂