मेरे ईश्क का इतिहास मत

मेरे ईश्क का इतिहास मत लिखो, कि शहादत अभी बाकी है,
कुछ देर और ठहरो मेरे हूजूर, कि ईबादत अभी बाकी है…!!!

गुल गुलज़ार होना चाहता है

गुल गुलज़ार होना चाहता है
कोई गुनाह फिर से करना चाहता है
महकें तो क़िस्मत उसकी पर
किसी क़िताब में दफ़न होना चाहता है

चुपके से आकर इस दिल में

चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो, सांसों में मेरी खुशबु बन के
बिखर जाते हो, कुछ यूँ चला है तेरे “इश्क” का जादू, सोते-जागते तुम ही
तुम नज़र आते हो…!!!

Chupake se aakar is dil mein utar jaate ho, Saanson mein meee
khushabu ban ke bikhar jate ho, kuchh yoon chala hai tere ishk
ka jaadu, Sote-jaagate tum hi tum nazar aate ho….!!!